बाइपोलर विकार
मूड में बदलाव पहचानें और सहयोग के साथ स्थिर दिनचर्या बनाएँ।
संक्षेप में
बाइपोलर विकार में मूड, ऊर्जा, गतिविधि, नींद और सोच में ऐसे अलग दौर आ सकते हैं जो सामान्य उतार-चढ़ाव से अधिक तीव्र या लंबे हों। अवसाद के दौर में कम मूड या रुचि खत्म हो सकती है; मैनिया या हाइपोमैनिया में असामान्य रूप से बहुत ऊर्जा या चिड़चिड़ापन, नींद की कम जरूरत, तेज़ विचार या बोलना, और आवेगपूर्ण अथवा जोखिम वाले व्यवहार हो सकते हैं। निदान के लिए विस्तृत क्लिनिकल इतिहास जरूरी है। थायरॉइड की समस्या, दवाएँ, शराब या अन्य नशीले पदार्थ, नींद की कमी और दूसरी मानसिक स्वास्थ्य स्थितियाँ भी ऐसे लक्षण दे सकती हैं।
थेरेपी कैसे मदद करती है
बाइपोलर विकार में आमतौर पर लगातार चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक देखभाल चाहिए। योग्य प्रिस्क्राइबर निदान, दवा, शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी बातों और निगरानी का आकलन करते हैं; इस पृष्ठ या केवल थेरेपी सत्र के आधार पर दवा शुरू, बंद या बदलें नहीं। थेरेपी मूड और नींद ट्रैक करने, दिनचर्या, रिलेप्स रोकने की योजना और चाहें तो परिवार से संवाद में मदद कर सकती है। गंभीर बेचैनी, मनोविकृति, खतरनाक आवेग, लंबे समय तक नींद न आना, आत्महत्या के विचार या अपनी देखभाल न कर पाना हो तो तत्काल आकलन जरूरी है।
आम संकेत और लक्षण
आप इनमें से एक या अधिक लक्षण महसूस कर सकते हैं:
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